Be kid again and grow with me...and I assure you enjoy your childhood again...

Thursday, June 28, 2007

आ गयी हूँ मैं...

आपका स्वागत है। मैं जानती हूँ कि आप अचंभित होंगे कि मैं इतनी छोटी सी कैसे इतनी बातें करती हूँ। जी हाँ, भगवान् ने मुझे आप सभी लोगों के लिए भेजा है। आप सभी को ये सिखाना है कि हम बच्चों के साथ कैसे बर्ताव करनी चाहिऐ। क्योंकि आप सभी लोग आज के भौतिकवादी और क्षन्भंगूर स्वप्निल संसार मे मग्न हैं। कोई भी हम नन्हें मुन्नों कि सुध लेने वाला नहीं है।


क्या आपने कभी सोचा है कि हम बच्चों को आपसे क्या चाहिऐ। आप हमें वोही देते हैं जो आप समझते हैं कि अच्छा है। हम क्या समझते हैं कभी आपने सोचा है। क्या आपने कभी हमारी सुध ली है।

अच्छा छोडो, मेरे दूध पीने का समय हो गया है.....समय पे दूध दे दिया करो और ज्यादा मत रुलाया करोवार्ना भगवान् जी से आपकी शिक़ायत लगा दूंगी। फिर अगर उन्होने आपकी रेटिंग खराब करके नरक में भेज दिया तो मुझे दोष मत देना। बाद मे बात करती हूँ.....

इश्वर दूत,
अकी

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